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बंद घड़ी और सही समय

बंद घड़ी और समय की सच्चाई: एक प्रेरणादायक कहानी

एक छोटे से गाँव में एक पुरानी घड़ी थी, जो सालों से खराब पड़ी थी। उसकी सुईयाँ एक ही समय पर अटकी हुई थीं। गाँव के लोग उस घड़ी को बेकार समझकर नज़रअंदाज़ कर देते। वह घड़ी खुद भी सोचती थी, "मैं किसी काम की नहीं हूँ, मुझसे तो वे घड़ियाँ बेहतर हैं जो समय बताती हैं, भले ही वे थोड़ा आगे या पीछे क्यों न हों।"

गाँव में दो और घड़ियाँ थीं

पहली घड़ी समय से पाँच मिनट आगे चलती थी और दूसरी समय से दस मिनट पीछे। ये दोनों घड़ियाँ चल रही थीं, लेकिन कभी भी सही समय नहीं दिखा पाती थीं। फिर भी लोग उनकी ओर देख लेते थे, क्योंकि वे चलती रहती थीं।

बंद घड़ी ने सोचा, "भले ही मैं दिन में दो बार सही समय दिखा देती हूँ, लोग मुझे नकार देते हैं, लेकिन इन घड़ियों को हमेशा तवज्जो मिलती है।"

विद्वान का आगमन

एक दिन गाँव में एक विद्वान पहुँचे। उन्होंने तीनों घड़ियों को देखा और गाँववालों को बुलाकर कहा:
"इन तीनों घड़ियों में ज़िंदगी के महत्वपूर्ण सबक छिपे हुए हैं।"

1. पहली घड़ी (जो 5 मिनट आगे थी):
"यह घड़ी हमें सिखाती है कि जो लोग हमेशा जल्दी में रहते हैं, वे भी अक्सर ग़लतियाँ करते हैं। उनका उत्साह और गति सराहनीय है, लेकिन अगर वे थोड़ा धैर्य रखें, तो ज्यादा सही और सटीक काम कर सकते हैं।"


2. दूसरी घड़ी (जो 10 मिनट पीछे थी):
"यह घड़ी हमें बताती है कि पीछे रह जाना कोई बुरी बात नहीं है। परंतु अगर आप हमेशा पीछे रहते हैं और सही समय पर निर्णय नहीं लेते, तो आपके प्रयासों का सही परिणाम नहीं मिलेगा।"


3. तीसरी घड़ी (जो बंद थी):
"अब इस घड़ी को देखो। भले ही यह बंद है, लेकिन यह दिन में दो बार सही समय दिखाती है। यह हमें सिखाती है कि चाहे हम कितने भी ठहराव में हों, हमारा मूल्य है। हमारे जीवन का हर पल मायने रखता है, और कभी-कभी ठहराव में भी गहराई होती है। सही समय आने पर हर किसी का योगदान महत्वपूर्ण होता है।"



सबक

विद्वान ने कहा,
"एक बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही हो सकती है, जबकि समय से आगे या पीछे चलने वाली घड़ी हमेशा ग़लती करती है। जीवन में कभी भी खुद को बेकार मत समझो। हर इंसान का सही समय पर अपना महत्व होता है। हमें धैर्य रखना चाहिए और अपने समय का इंतज़ार करना चाहिए।"

गाँववाले यह सुनकर चकित रह गए। उन्होंने बंद घड़ी को ठीक करवाने का फैसला किया और महसूस किया कि हर चीज़ और हर व्यक्ति की अपनी उपयोगिता होती है, भले ही वह नजरअंदाज क्यों न हो।


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सीख:

1. धैर्य और विश्वास: खुद पर विश्वास बनाए रखें। भले ही अभी आपके प्रयासों का परिणाम न दिख रहा हो, सही समय पर आपकी मेहनत का फल मिलेगा।


2. हर चीज़ की अपनी अहमियत: ज़िंदगी में कोई भी चीज़ बेकार नहीं होती। हर व्यक्ति और वस्तु का अपना समय होता है।


3. अति जल्दी या अति धीमी गति से बचें: संतुलन और सही दिशा से ही सफलता मिलती है।



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