Skip to main content

When I meet Alberto Einstino

Okay when I meet with Great Albert Einstein 

He told me.... No he yelled at me 

Can't you see space 


Now realised off course there is Space 

WisE

W is E 

Now I am free and learning the Direct message here


WisE

And we came to know English Winglish 


Don't hesitate to express your thoughts 💭 people ⬇️



Comments

Popular posts from this blog

भानगढ़: आत्मभान का गढ़ और उसके तेजस्वी सहयोगी

  किसी समय की बात है, जब ज्ञान, शक्ति और आत्मचेतना के मार्ग को समझने के लिए साधक अपनी यात्रा पर निकलते थे। इस यात्रा में एक स्थान था, जिसे "भानगढ़" कहा जाता था—यह केवल एक किला नहीं था, बल्कि आत्मबोध का केंद्र, चेतना का दुर्ग और दिव्यता का प्रवेशद्वार था। आत्मभान: वह जिसने स्वयं को जान लिया इस गढ़ का स्वामी था आत्मभान पंडित—एक ऐसा ज्ञानी जिसने स्वयं को और समस्त ब्रह्मांड को जान लिया था। वह न केवल आत्मज्ञान का प्रतीक था, बल्कि अपने तेजस्वी सहयोगियों के साथ मिलकर इस संसार को प्रकाशमान कर रहा था। भानगढ़ के रक्षक: आत्मभान के सहयोगी आत्मभान अकेला नहीं था। उसके साथ थे पंद्रह महान योद्धा और संरक्षक, जो ब्रह्मांड की विभिन्न शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते थे। ये सभी भानगढ़ की रक्षा करते और सत्य, शक्ति, और ज्ञान का प्रसार करते। १. दिव्य प्रकाश के योद्धा (Celestial Guardians) चंद्रभान – जिसने चंद्रमा की तरह शीतल ज्ञान दिया और आत्मा को शांति प्रदान की। सूर्यभान – जिसने सूर्य की तरह सत्य और प्रकाश फैलाया, जिससे अज्ञान का अंधकार मिट गया। अग्निभान – जिसने अग्नि के समान परिवर्तनकारी शक्ति द...

बंद घड़ी और सही समय

बंद घड़ी और समय की सच्चाई: एक प्रेरणादायक कहानी एक छोटे से गाँव में एक पुरानी घड़ी थी, जो सालों से खराब पड़ी थी। उसकी सुईयाँ एक ही समय पर अटकी हुई थीं। गाँव के लोग उस घड़ी को बेकार समझकर नज़रअंदाज़ कर देते। वह घड़ी खुद भी सोचती थी, "मैं किसी काम की नहीं हूँ, मुझसे तो वे घड़ियाँ बेहतर हैं जो समय बताती हैं, भले ही वे थोड़ा आगे या पीछे क्यों न हों।" गाँव में दो और घड़ियाँ थीं पहली घड़ी समय से पाँच मिनट आगे चलती थी और दूसरी समय से दस मिनट पीछे। ये दोनों घड़ियाँ चल रही थीं, लेकिन कभी भी सही समय नहीं दिखा पाती थीं। फिर भी लोग उनकी ओर देख लेते थे, क्योंकि वे चलती रहती थीं। बंद घड़ी ने सोचा, "भले ही मैं दिन में दो बार सही समय दिखा देती हूँ, लोग मुझे नकार देते हैं, लेकिन इन घड़ियों को हमेशा तवज्जो मिलती है।" विद्वान का आगमन एक दिन गाँव में एक विद्वान पहुँचे। उन्होंने तीनों घड़ियों को देखा और गाँववालों को बुलाकर कहा: "इन तीनों घड़ियों में ज़िंदगी के महत्वपूर्ण सबक छिपे हुए हैं।" 1. पहली घड़ी (जो 5 मिनट आगे थी): "यह घड़ी हमें सिखाती है कि जो लोग हमेशा जल्दी में ...